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भले ही मैंने "मैं!.. मैं!.." लिखा हो, फिर भी आप मैं ही हो, जो कुछ भी नहीं से आ सकता है, और मेरे लिए स्वार्थ फिर से आप से आता है...| हसन फ़ैज़ी (आरए)

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